दिल्ली यूनिवर्सिटी के दृष्टिबाधित छात्र रोज़ाना झेल रहे हैं सड़कों की भारी परेशानियां

दिल्ली यूनिवर्सिटी के दृष्टिबाधित छात्रों को रोज़ाना शहर की सड़कों पर चलने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। किरोड़ी मल कॉलेज के राजन कुमार और निखिल जैसे छात्र आवाज़ और याददाश्त के सहारे अपना सफर तय करते हैं। The Times of India की 29 अगस्त 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, इन छात्रों को बिना सिग्नल वाले चौराहे, बिना ज़ीब्रा क्रॉसिंग और बिना स्पर्श पथ (tactile pathways) वाली सड़कों से गुजरना पड़ता है। सड़कों पर उबड़-खाबड़ रास्ते, गड्ढे, तेज रफ्तार ट्रैफिक और आवारा कुत्ते उनके सफर को और खतरनाक बना देते हैं। भारी बारिश के दौरान जलभराव होने के कारण कई बार छात्रों की कक्षाएं भी छूट जाती हैं।
बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए प्रशासन के प्रयास
सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) ने 28 अगस्त 2026 को घोषणा की है कि शहीद जीत सिंह मार्ग, शाहबाद डेयरी, जीवन पार्क और माता चनन देवी अस्पताल के पास लिफ्ट, आवाज़ की सुविधा और बाधा मुक्त पहुँच वाले चार नए फुट ओवरब्रिज (FOB) बनाए जाएंगे। इसके अलावा, मार्च 2026 में दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने उपराज्यपाल तंरजीत सिंह संधू से पूरी राजधानी में ऑडियो ट्रैफिक सिग्नल लगाने का औपचारिक अनुरोध किया था। विजेंद्र गुप्ता ने बताया कि दिल्ली में लगभग 60 लाख लोग दृष्टिबाधित हैं, जिनमें से 12 से 18 लाख लोगों को गंभीर रूप से कम दिखाई देता है।
संस्थानों और संगठनों की भूमिका
किरोड़ी मल कॉलेज के डिसेबिलिटी रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर के समन्वयक प्रोफेसर सोमेश्वर साती ने बताया कि विकलांगता को लेकर समाज की सोच इन चुनौतियों को और बढ़ाती है। इसी कड़ी में जुलाई 2026 में मैत्रेयी कॉलेज में 'सुगम' इंडोर नेविगेशन सिस्टम शुरू किया गया। नेशनल एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड (NAB दिल्ली) और बैटल फॉर ब्लाइंड फाउंडेशन जैसे संगठन सफेद छड़ी और जीपीएस तकनीक का प्रशिक्षण देते हैं। हालांकि, दिल्ली मेट्रो में कुछ सुविधाएं मिलने के बाद भी खराब रास्ते और उबड़-खाबड़ फुटपाथ बड़ी बाधा बने हुए हैं।
सरकारी सुरक्षा और यातायात अभियान
सरकार की ओर से हाल ही में कई पहल की गई हैं, जिनमें दिल्ली ट्रैफिक पुलिस का 28 अगस्त 2026 को शुरू किया गया 'राखी का वादा, सुरक्षा का इरादा' सुरक्षा अभियान शामिल है। इसके अलावा 27 अगस्त 2026 के आसपास शुरू होने वाला 'ड्राइव ऑफ द डे' कार्यक्रम भी है, जिसका उद्देश्य ट्रैफिक जाम और सड़क किनारे की बाधाओं को हटाना है, जो कमजोर पैदल चलने वालों को सबसे ज्यादा प्रभावित करती हैं।