सुप्रीम कोर्ट नीट प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR रद्द करने की दिल्ली पुलिस की याचिका पर करेगा सुनवाई

देश की सर्वोच्च अदालत नीट प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों पर सुनवाई करने जा रही है। भारत का सुप्रीम कोर्ट दिल्ली पुलिस की उस याचिका पर सुनवाई करेगा जिसमें नीट प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज 13 एफआईआर को रद्द करने की मांग की गई है। यह याचिका 31 अगस्त 2026 को दाखिल की गई थी। इसमें शीर्ष अदालत से संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग करने का आग्रह किया गया है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस मामले में तत्काल सुनवाई की मांग की थी।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने सुनवाई की अनुमति दी। इस बेंच में जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना भी शामिल हैं। यह सुनवाई 1 सितंबर 2026 को तय की गई है। दिल्ली पुलिस ने नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के डेटाबेस से पहचाने गए 2873 लोगों के खिलाफ नई एफआईआर दर्ज करने की अनुमति मांगी है। इन लोगों पर शारीरिक नुकसान या संपत्ति को नष्ट करने के गंभीर आरोप हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया कि 20 जुलाई से 25 जुलाई 2026 के बीच की घटनाओं के लिए कोई नई एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी।
यह कदम कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा आंदोलन स्थगित करने के बाद उठाया गया है। सरकार ने 25 जुलाई को अभियोजन के दायरे को सीमित करने का फैसला किया था। सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने पुष्टि की कि पार्टी के सदस्य और वकील प्रशांत भूषण सुनवाई में शामिल होंगे। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अदालत को सुलह की प्रक्रिया से कोई दिक्कत नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सभी पक्षों को कानून का पालन करना चाहिए।
बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और असम राज्यों ने भी सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। इन राज्यों ने अपने यहां छात्र प्रदर्शनों से जुड़ी 116 एफआईआर को रद्द करने की मांग की है। सीजेपी द्वारा 5 सितंबर 2026 को एक और विरोध मार्च की योजना बनाई गई है।