टोंस नदी पर किशाऊ बांध परियोजना के लिए छह राज्यों और केंद्र ने किया ऐतिहासिक समझौता

दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में मंगलवार 15 सितंबर 2026 को छह राज्यों और केंद्र ने किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना के लिए एक औपचारिक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते से परियोजना की लागत साझा करने को लेकर पिछले आठ साल से चल रहा गतिरोध समाप्त हो गया है। इस बैठक में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा के मुख्यमंत्री शामिल हुए। एएनआई के अनुसार, बैठक के दौरान राज्यों और केंद्र के बीच लगभग 28 संबंधित समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इस दौरान केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन सहित कई अधिकारी भी मौजूद रहे।
बांध की विशेषताएं और वित्तीय शर्तें
आधिकारिक ब्रीफिंग के अनुसार, यह कंक्रीट ग्रेविटी बांध 232.6 मीटर ऊंचा होगा। इस परियोजना से 0.97 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होगी और सालाना लगभग 1,476 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन होने की उम्मीद है। इस परियोजना के पानी का उपयोग दिल्ली और राजस्थान में पीने और औद्योगिक जरूरतों के साथ-साथ यमुना प्रणाली में पानी के प्रवाह को बढ़ाने के लिए किया जाएगा। समझौते के तहत, केंद्र सरकार जल घटक लागत का 90 प्रतिशत केंद्रीय सहायता के रूप में देगी, जबकि छह भाग लेने वाले राज्य मिलकर शेष 10 प्रतिशत हिस्सा उठाएंगे। हिमाचल प्रदेश को जल घटक के वित्तपोषण से छूट दी गई है और उसका पानी का हिस्सा दिल्ली तथा राजस्थान को स्थानांतरित कर दिया गया है।
प्रभावित क्षेत्र और डूब क्षेत्र की जानकारी
परियोजना के डूब क्षेत्र में लगभग 17 गांव और 5,500 लोग प्रभावित होंगे, जिसमें लगभग 2,950 हेक्टेयर भूमि शामिल है। इसमें हिमाचल प्रदेश में लगभग 1,498 हेक्टेयर और उत्तराखंड में 1,452 हेक्टेयर भूमि शामिल है। किशाऊ रेणुकाजी और लखवार बांधों के बाद ऊपरी यमुना प्रणाली में तीसरी बड़ी भंडारण परियोजना है। निर्माण कार्य शुरू होने से पहले अब केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा इस परियोजना को मंजूरी देना आवश्यक है। इसके बाद किशाऊ निगम को सभी आवश्यक पर्यावरण और वन स्वीकृतियां प्राप्त करनी होंगी।