दिल्ली के नजफगढ़ झील में दिखा बेहद दुर्लभ साइबेरियाई पक्षी शार्प-टेल्ड सैंडपाइपर

दिल्ली और गुरुग्राम के बीच स्थित नजफगढ़ झील में एक बहुत ही दुर्लभ साइबेरियाई मेहमान शार्प-टेल्ड सैंडपाइपर देखा गया है। पिछले 150 सालों में भारत में इस पक्षी के दिखने की यह केवल पांचवी घटना है। यह पक्षी आमतौर पर उत्तरी साइबेरिया में प्रजनन करता है।
Indian Birds जर्नल के अनुसार, इससे पहले इसके चार रिकॉर्ड दर्ज किए गए हैं। इसमें 1880 में गिलगित में नर, 1915 में तमिलनाडु के वंदलूर में मादा, 2004 में छत्तीसगढ़ के कुरुद टैंक में एक अपुष्ट रिकॉर्ड और 24 सितंबर 2019 को नजफगढ़ दलदल में एक पक्षी की तस्वीर शामिल है। इसके अलावा, बर्डचर अक्षित दुआ ने 30 या 31 अगस्त 2026 को गुरुग्राम के चंदू गांव में भी इसे देखे जाने की रिपोर्ट दी है।
नजफगढ़ झील का महत्व और संरक्षण
नजफगढ़ झील दिल्ली और गुरुग्राम के बीच एक महत्वपूर्ण ट्रांसबाउंड्री वेटलैंड है, जो सेंट्रल एशियाई फ्लाईवे का हिस्सा है और प्रवासी पक्षियों के लिए एक अहम आवास है। पारिस्थितिक रूप से महत्वपूर्ण और संरक्षित वन होने के बावजूद, इस झील को 11 साल से आधिकारिक वेटलैंड का दर्जा मिलने का इंतजार है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए पर्यावरण मंत्रालय को 4 सितंबर 2025 से आठ सप्ताह का समय दिया है।
दिल्ली और हरियाणा दोनों सरकारों ने इस क्षेत्र के लिए पर्यावरण प्रबंधन योजनाएं दाखिल की हैं। INTACH के पर्यावरणविद् मनु भटनागर और दिवान सिंह ने इस आधिकारिक सुरक्षा की जरूरत पर जोर दिया है। जनवरी 2025 की एशियाई जलपक्षी जनगणना (AWC) में पक्षियों की कुल संख्या में भले ही गिरावट आई हो, लेकिन प्रजातियों की विविधता में बढ़ोतरी इस क्षेत्र की क्षमता को दर्शाती है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत दुर्लभ प्रजातियों को अनुसूची-I का दर्जा दिया जाता है।