POSH at Work ने भारत में कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न पर जारी की दो नई शोध रिपोर्ट

31 अगस्त 2026 को, 'द लीगल स्वान' के 'POSH at Work' ने संस्थापक और वकील शिवानी प्रसाद के नेतृत्व में दो शोध रिपोर्ट जारी की हैं। इन रिपोर्टों के नाम 'द क्वाइट क्राइसिस' और 'द साइलेंट गैप' हैं। यह जानकारी ANI News के माध्यम से सामने आई है। इस शोध में 2025 की 103 शिकायतों और 6,353 प्रतिभागियों के सर्वेक्षण डेटा का उपयोग किया गया है।
शोध रिपोर्ट के मुख्य बिंदु
24.86% कर्मचारी अपने संगठन की POSH नीति से अनजान हैं। 38.45% लोग गालियों या अशिष्ट भाषा को यौन उत्पीड़न के रूप में नहीं पहचान पाते। इसके अलावा, 54.27% कर्मचारी और 41.14% मैनेजर सक्रिय शिकायत को सहकर्मियों के साथ चर्चा करने की बात मानते हैं, जो गोपनीयता नियम का उल्लंघन है। 53.95% मैनेजरों का गलत मानना है कि दोष साबित करने के लिए हमेशा प्रत्यक्ष प्रमाण की आवश्यकता होती है।
सरकारी और कानूनी बदलाव
यह शोध ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) और राज्य सरकारें कड़े अनुपालन ऑडिट कर रही हैं। NCW ने 19 जून 2026 को एक एडवाइजरी जारी कर दस या अधिक कर्मचारियों वाले संस्थानों के लिए वार्षिक POSH ऑडिट अनिवार्य किया है। NCW चेयरपर्सन विजया रहाटकर ने कहा कि महिलाओं को गरिमा और आजीविका में से एक को नहीं चुनना चाहिए। इस संबंध में अधिक जानकारी NCW Press Release पर उपलब्ध है। इसके अलावा, महिला और बाल विकास मंत्रालय ने 20 फरवरी 2026 से संशोधन नियम लागू किए हैं, जिसके तहत ANI News Delhi कवरेज के अनुसार 'पीड़ित व्यक्ति' की परिभाषा में पुरुषों और ट्रांसजेंडर कर्मचारियों को भी शामिल किया गया है।