दिल्ली-एनसीआर में पुरानी कमर्शियल गाड़ियों के लिए परिवर्तन योजना की रफ्तार धीमी

दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में पुरानी कमर्शियल गाड़ियों को बदलने के लिए शुरू की गई परिवर्तन योजना की रफ्तार अभी धीमी बनी हुई है। इस योजना की शुरुआत केंद्र सरकार द्वारा 14 जुलाई 2026 को की गई थी। शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 तक इस योजना के तहत कुल 1,357 वाहनों का पंजीकरण हुआ है। इस योजना के बारे में विस्तृत जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
पंजीकरण के आंकड़े और राज्यों की स्थिति
पंजीकरण के आंकड़ों के अनुसार, इसमें 1,094 ट्रक और 263 बसें शामिल हैं। दिल्ली इस मामले में सबसे आगे है जहां 785 पंजीकरण हुए हैं। इसके बाद हरियाणा में 423, राजस्थान में 93 और उत्तर प्रदेश में 56 पंजीकरण दर्ज किए गए हैं। व्यक्तिगत वाहन मालिकों ने इनमें से 651 पंजीकरण कराए हैं। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने इस कार्यक्रम की समय सीमा को तेज कर दिया है और इसे दो साल के बजाय एक साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
मंत्रालय का लक्ष्य और सरकारी प्रोत्साहन
मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर ने 28 अगस्त 2026 को बताया कि मंत्रालय को उम्मीद है कि अक्टूबर 2026 तक 25,000 से अधिक कमर्शियल वाहन मालिक पंजीकरण कराएंगे। इस योजना का कुल वित्तीय परिव्यय 9,585 करोड़ रुपये है। इसमें केंद्र सरकार की तरफ से 5,041 करोड़ रुपये की बजटीय सहायता शामिल है। योजना के तहत 5 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी, 10 साल के लिए 100 प्रतिशत सड़क कर छूट और अन्य लाभ दिए जा रहे हैं।
दिल्ली में पुराने वाहनों के नियम
इसके अलावा दिल्ली सरकार पुराने वाहनों पर कड़े नियम लागू करती है। दिल्ली में 10 साल से पुरानी डीजल और 15 साल से पुरानी पेट्रोल गाड़ियों के चलने पर प्रतिबंध है। मालिकों को बीएस-III या उससे पुराने वाहनों को अधिकृत केंद्रों पर कबाड़ में देना होता है। बेड़े के प्रबंधन में सहायता के लिए दिल्ली सरकार ने 31 अक्टूबर 2025 को अनापत्ति प्रमाण पत्र के लिए एक साल की सीमा को हटा दिया था।