दिल्ली और भारत में 80 के दशक के रेट्रो ट्रेंड की जगह ले रहा है माचा ग्रीन टी का क्रेज

डिजिटल रेट्रो से फिजिकल माचा तक का सफर
नई दिल्ली से हिमंक त्रिपाठी की रिपोर्ट के अनुसार, 17 सितंबर को एएनआई द्वारा प्रकाशित जानकारी के मुताबिक 80 के दशक के नियॉन और सिंथ-वेव एस्थेटिक की यादें अब जेनरेटिव एआई ट्रेंड्स के जरिए सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं। कैसट टेप से लेकर डिजिटल रूप से रीकंस्ट्रक्टेड जवानी तक, लोग इस पुरानी यादों के दौर का आनंद ले रहे हैं। लेकिन स्क्रीन पर विंटेज ट्रेंड्स के बीच, दिल्ली और भारतीय काउंटरों व कैफे मेनू में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है।लोग अब डिजिटल 80 के दशक की वाइब को छोड़कर माचा (Matcha) के फिजिकल और तेजी से बढ़ते चलन को अपना रहे हैं।
माचा और स्वास्थ्य संबंधी खोजों में भारी उछाल
विंटेज एस्थेटिक के प्रति यह आकर्षण धीमा होने और जीवन को व्यवस्थित करने की गहरी सांस्कृतिक इच्छा को दर्शाता है। जहां 80 के दशक का फोटो फिल्टर एक पल का डिजिटल फन देता है, वहीं माचा का क्रेज एक वास्तविक दुनिया का अनुष्ठान प्रदान करता है।गूगल ब्लॉग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में 'माचा कैसे बनाएं' (how to make matcha) के सर्च में 1,300% की वृद्धि हुई है, साथ ही पारंपरिक तैयारी के टूल जैसे बांस की व्हिस्क (chasen) और बाउल (chawan) की मांग भी बढ़ी है। इसके अलावा, 'माचा प्रोटीन' सर्च में 2,500% और 'माचा हेल्थ' में 1,000% का उछाल आया है, साथ ही 'माचा बनाम कॉफी' की तुलना भी की जा रही है।
विभिन्न स्वादों और स्किनकेयर में माचा का प्रसार
भारतीय लोग क्लासिक लाटे से आगे बढ़कर स्ट्रॉबेरी माचा (+400%) और मैंगो माचा (+200%) के साथ-साथ जापानी ग्रीन टी (Hōjicha) और पर्पल यम (Ube) जैसे विकल्पों का प्रयोग कर रहे हैं।माचा का यह क्रेज अब केवल पेय पदार्थों तक सीमित नहीं है, बल्कि माचा-युक्त स्किनकेयर, इत्र और कपड़ों के लिए भी खोज की जा रही है। एआई टूल्स जैसे गूगल के एआई प्रीमियम प्लान और जेमिनी प्रो का उपयोग करते हुए, यह बदलाव डिजिटल नवीनता से व्यावहारिक और रोजमर्रा की उपयोगिता की ओर संक्रमण को दिखाता है, जहां जेमिनी लाइव जैसे रियल-टाइम टूल्स लोगों को पानी के तापमान और व्हिस्क करने की तकनीकों में मार्गदर्शन करते हैं।