भारत के लग्जरी रियल एस्टेट डेवलपर्स का बड़ा बदलाव, अब सेहतमंद लाइफस्टाइल वाले प्रोजेक्ट्स पर जोर

भारत के लग्जरी हाउसिंग डेवलपर्स अब दिखावे की बजाय वेलनेस-सेंट्रिक लिविंग पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। अमीर खरीदार अब प्रीवेंटिव हेल्थकेयर, लंबी उम्र और स्वस्थ जीवनशैली को प्राथमिकता दे रहे हैं। रियल एस्टेट सेक्टर में इस बदलाव से लो-डेंसिटी मास्टर प्लान, बायोफिलिक डिजाइन, क्लीन-एयर सिस्टम और इंटीग्रेटेड हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग तेजी से बढ़ रही है। इस बारे में पूरी जानकारी एएनआई न्यूज पर उपलब्ध है। जेएलएल के पहले तिमाही के बाजार आंकड़ों के अनुसार, भारत में प्रीमियम आवासीय सेगमेंट में प्रोजेक्ट लॉन्च में भारी तेजी आई है। ग्लोबल वेलनेस इंस्टीट्यूट का अनुमान है कि वैश्विक वेलनेस रियल एस्टेट उद्योग 2024 में 584 अरब डॉलर से बढ़कर 2029 तक 1.1 ट्रिलियन डॉलर हो जाएगा।
बदलती ग्राहकों की पसंद और रणनीतियां
उद्योग के नेता ग्राहकों की बदलती प्राथमिकताओं के अनुसार अपनी रणनीतियों को बदल रहे हैं। गुलशन ग्रुप की डायरेक्टर युक्ति नागपाल ने कहा कि अब लग्जरी का मतलब स्वस्थ और अधिक सार्थक जीवन जीने के तरीके से है, जिसमें गुलशन डायनेस्टी जैसे प्रोजेक्ट्स में हरियाली, गोपनीयता और प्रकृति से जुड़ाव को प्राथमिकता दी जाती है। त्रेहान आइरिस के कार्यकारी निदेशक अमन ट्रेhan ने बताया कि डेवलपर्स ऐसे माहौल तैयार कर रहे हैं जो दैनिक जीवन को बेहतर बनाते हैं। इसका उदाहरण गुरुग्राम में फर्म का 'ओमरा' प्रोजेक्ट है, जिसे भारत का पहला लग्जरी वेल-बीइंग रेजिडेंस माना गया है और इसमें एल'ऑकीटेन तथा नॉक्स जैसे ब्रांडों के साथ साझेदारी में एक लाॅन्गेविटी क्लिनिक भी शामिल है।
Tier I और Tier II शहरों में भी बढ़ रही है मांग
निम्बस ग्रुप की डायरेक्टर यामिनी अग्रवाल ने बताया कि यह ट्रेंड अब महानगरों से आगे निकल रहा है। टियर I और टियर II शहरों के खरीदार भी गुणवत्तापूर्ण आवास को दीर्घकालिक स्वास्थ्य और स्वच्छ पर्यावरण से जोड़ रहे हैं। महामारी के बाद से संपन्न खरीदारों के बीच गोपनीयता और पर्यावरणीय गुणवत्ता को लेकर आए बदलाव के कारण डेवलपर्स ने शुरुआती डिजाइन चरणों से ही वेलनेस से जुड़ी बातों को शामिल करना शुरू कर दिया है।