दिल्ली का ऐतिहासिक लोधी कॉलोनी रेलवे स्टेशन 1947 के बंटवारे की देता है गवाही

Kittu Kumari31 August 20261 min read263 viewsDelhi Local
दिल्ली का ऐतिहासिक लोधी कॉलोनी रेलवे स्टेशन 1947 के बंटवारे की देता है गवाही

दिल्ली का लोधी कॉलोनी रेलवे स्टेशन (स्टेशन कोड: LDCY) साल 1947 के भारत-पाकिस्तान बंटवारे का एक अहम और ऐतिहासिक प्रतीक है। उस समय यह स्टेशन लाहौर जाने वाले हजारों शरणार्थियों के लिए एक मुख्य ट्रांजिट पॉइंट के रूप में काम करता था। बंटवारे के दौरान इस स्टेशन से पाकिस्तान जाने वाले लोगों के लिए विशेष ट्रेनें रवाना होती थीं। इन विशेष ट्रेनों में पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर सिकंदर बख्त के पिता जवान बख्त भी शामिल थे। इतिहासकार और रेलवे बोर्ड के पूर्व अधिकारी रविंदर कुमार के अनुसार, उस तनावपूर्ण समय में शरणार्थी ट्रेनों के समय को बहुत सावधानी से मैनेज किया जाता था। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि शरणार्थी ट्रेनें रात होने से पहले लाहौर पहुंच जाएं, ताकि शरणार्थी ट्रेनों पर होने वाले हमलों से उनकी रक्षा की जा सके।

बदलाव के बाद भी आज भी वैसा ही है स्टेशन

साल 1947 के बाद से दिल्ली में बहुत बड़ा शहरी बदलाव आ चुका है, लेकिन लोधी कॉलोनी रेलवे स्टेशन की भौतिक संरचना में आज भी कोई खास बदलाव नहीं आया है। आज के समय में इस स्टेशन को दिल्ली उपनगरीय रेलवे नेटवर्क के भीतर एक गुमनाम और भुला दिए गए लैंडमार्क के रूप में जाना जाता है। वर्तमान में इस स्टेशन पर बहुत कम गतिविधि देखने को मिलती है।

वर्तमान स्थिति और ट्रेनों का ठहराव

वर्तमान में रेलयात्री द्वारा इस स्टेशन को 'ग्रेड ओ' स्टेशन के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इसका साफ मतलब यह है कि इस स्टेशन पर कोई भी यात्री ट्रेन नहीं रुकती है। जमीनी निरीक्षण से पता चलता है कि यह स्टेशन आज भी पूरी तरह से वीरान और सूना रहता है, जहां स्टेशन परिसर के अंदर या बाहर कभी-कभार ही कोई इक्का-दुक्का आगंतुक नजर आता है।

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