31 अगस्त 2026 को देश के अलग-अलग शहरों में हवा की गुणवत्ता यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) में बड़ा अंतर देखा गया। कुछ शहरों में हवा अस्वस्थ श्रेणी में दर्ज की गई, जबकि अन्य जगहों पर स्थिति अलग रही। इस रिपोर्ट में विभिन्न शहरों के आंकड़े और प्रदूषण से निपटने के उपायों की जानकारी दी गई है। - 31 अगस्त 2026 को भारतीय शहरों में प्रदूषण का स्तर अलग-अलग दर्ज किया गया। - दिल्ली, मुंबई, कैथल और चरखी दादरी सहित कई शहरों के आंकड़े सामने आए। - विशेषज्ञों ने भारत के वायु गुणवत्ता मानकों और डब्ल्यूएचओ के नियमों में अंतर बताया। - पराली प्रबंधन और सरकारी योजनाओं पर भी जानकारी साझा की गई।
दिल्ली में अलग-अलग स्रोतों के अनुसार AQI के आंकड़े भिन्न रहे। एनडीटीवी के अनुसार दिल्ली में AQI 135 (खराब) दर्ज किया गया, जिसमें PM10 का स्तर 115.72 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और PM2.5 का स्तर 113.67 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा। वहीं, द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक AQI 98 (मध्यम) और हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार औसत AQI 129 (मध्यम) दर्ज किया गया। मुंबई में एनडीटीवी ने AQI 62 (मध्यम) और द टाइम्स ऑफ इंडिया ने 37 (अच्छा) दर्ज किया।
हरियाणा के कई शहरों में हवा की गुणवत्ता काफी खराब पाई गई। कैथल में AQI 237, चरखी दादरी में 217 और भिवानी में 204 दर्ज किया गया। इसके अलावा अंबाला, अमृतसर, बुलंदशहर और कोयंबटूर में AQI 154 या 151 दर्ज हुआ। लखनऊ (110), ग्रेटर नोएडा (114) और गुरुग्राम (107) में हवा 'खराब' श्रेणी में रही, जबकि जयपुर (82) और बेंगलुरु (63) में हवा की स्थिति मध्यम बनी रही।
सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2026 के पहले 28 दिनों में दिल्ली का औसत AQI 92 रहा, जो 2023 के बाद इस अवधि में सबसे अधिक है। विशेषज्ञों ने बताया कि भारत का वार्षिक PM2.5 मानक 40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की 5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर की सीमा से आठ गुना अधिक है। पराली गलाने के लिए विश्वविद्यालयों के शोधकर्ताओं ने 27 अगस्त 2026 को मिट्टी के सूक्ष्मजीवों का उपयोग करने का अध्ययन प्रकाशित किया। सरकार की राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) योजना के तहत 2019 से काम चल रहा है, लेकिन जनवरी 2026 तक केवल 23 शहरों ने PM10 में 40 प्रतिशत कमी का लक्ष्य पूरा किया है।