हरियाणा में भूजल की गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, साल 2022 की तुलना में 2025 में राज्य के 142 में से 93 ब्लॉकों में पानी की गुणवत्ता में गिरावट दर्ज की गई है। राज्य विधानसभा में लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के मंत्री रणबीर गंगवा द्वारा 27 अगस्त को पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में औसत कुल घुलित ठोस यानी टीडीएस का स्तर 658 मिलीग्राम प्रति लीटर से बढ़कर 737 मिलीग्राम प्रति लीटर हो गया है। इस बारे में अधिक जानकारी UNI India पर उपलब्ध है।
राज्य के 142 ब्लॉकों में से 88 ब्लॉक ऐसे हैं जहां औसत टीडीएस स्तर 500 मिलीग्राम प्रति लीटर की स्वीकार्य सीमा से अधिक पाया गया है। इनमें से 35 ब्लॉक ऐसे हैं जहां टीडीएस का स्तर 1,000 मिलीग्राम प्रति लीटर या उससे भी अधिक दर्ज किया गया है। पलवल और नूंह जिलों को इस समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र बताया गया है। पलवल में, जहां सभी छह ब्लॉक पूरी तरह से भूजल पर निर्भर हैं, पिछले तीन वर्षों में औसत टीडीएस स्तर में 74 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो 940 मिलीग्राम प्रति लीटर से बढ़कर 1,636 मिलीग्राम प्रति लीटर हो गया है।
नूंह के इंद्री ब्लॉक में अधिकारियों ने औसतन 1,974 मिलीग्राम प्रति लीटर टीडीएस स्तर दर्ज किया है। यह आंकड़ा साल 2022 के स्तर से लगभग दोगुना है और 2,000 मिलीग्राम प्रति लीटर की अधिकतम स्वीकार्य सीमा के करीब पहुंच रहा है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि राज्य में कुछ विशेष पीने के पानी के स्रोतों में टीडीएस का स्तर 9,553 मिलीग्राम प्रति लीटर तक पहुंच गया है। कांग्रेस विधायक आदित्य सुरजेवाला ने जल संसाधनों के प्रबंधन को लेकर राज्य सरकार की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि व्यापक नहर नेटवर्क होने के बावजूद यह संकट हर साल और गहराता जा रहा है।
सरकार ने विधानसभा में यह भी स्वीकार किया कि नूंह के 82 और पलवल के 21 गांवों को प्रतिदिन प्रति व्यक्ति 40 लीटर से भी कम पानी मिलता है। इसके अलावा नूंह के 140 और पलवल के 54 गांवों में 40 से 54 लीटर पानी ही मिल पाता है, जो जल जीवन मिशन के तहत केंद्र सरकार द्वारा तय किए गए 55 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन के न्यूनतम मानक से कम है। साल 2019 से राज्य में सीवेज या ड्रेनेज सिस्टम से जुड़े पेयजल संदूषण को लेकर कुल 41,275 शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं।