फरीदाबाद पुलिस का बड़ा एक्शन, एक हफ्ते में 45 साइबर ठग गिरफ्तार और नकदी बरामद

फरीदाबाद पुलिस ने एक सप्ताह के भीतर बड़ी कार्रवाई करते हुए 45 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। यह विशेष अभियान 22 अगस्त से 28 अगस्त के बीच चलाया गया, जिसमें पुलिस के तीनों साइबर थानों की टीमों ने हिस्सा लिया। इस दौरान आरोपितों के कब्जे से तीन लाख 66 हजार रुपए की नकदी बरामद की गई है। इसके अलावा, पुलिस ने साइबर ठगी से जुड़ी शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए चार लाख 98 हजार 717 रुपए की राशि विभिन्न बैंक खातों में सफलताપૂર્વક फ्रीज कराई है। गिरफ्तार किए गए लोगों में हरप्रीत, हर्ष, रोहित परिहार, मासूम, सोहिल, सचिन, जय किशन, शुभम, अंकित कुमार, हिमांशु, दिनकर, सौरभ, धनंजय, अंजली गौड़, कंचन शर्मा, नितिन अग्रवाल, प्रसून, रोहित, फरदीन, अब्दुल अलीम, सचिन कुमार, रघुवेंद्र, राहुल, जय बिष्ट, निक्की यादव, भील विहा, विशाल, भील हीरा, विशाल त्यागी, आरती, ओंकार, रंजीत यादव, कार्तिक भसीन, अंकुर चौहान, विक्रम, पुनीत सक्सेना, हितेश, गौरव, ओंकार, रामचंद्र, दक्ष कालड़ा, राजा पाश्वन, हदीप सिंह, परवीन और बासिफ शामिल हैं।
पुलिस कार्रवाई और मामलों का विवरण
पुलिस प्रवक्ता ने रविवार को जानकारी दी कि तीनों साइबर थानों की टीमों ने कुल 13 मामलों में इन 45 आरोपियों को पकड़ा है। इन मामलों में साइबर थाना एनआईटी के तीन मामले, साइबर थाना सेंट्रल के छह मामले तथा साइबर थाना बल्लभगढ़ के चार मामले शामिल हैं। पुलिस टीमों ने इन मामलों पर काम करते हुए कुल 369 शिकायतों का सफल निस्तारण किया है। फरीदाबाद पुलिस लगातार साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए ऐसे अभियान चला रही है ताकि अपराधियों को पकड़ा जा सके और पीड़ितों को राहत मिल सके।
पुलिस उपायुक्त की आमजन से अपील
पुलिस उपायुक्त मुख्यालय हिमाद्री कौशिक ने आमजन से साइबर अपराधों के प्रति सतर्क और जागरूक रहने की विशेष अपील की है। उन्होंने बताया कि लोग अक्सर अधिक धन कमाने या कम समय में ज्यादा लाभ पाने के लालच में साइबर ठगों के जाल में फंस जाते हैं और बिना पूरी जानकारी के अपनी मेहनत की कमाई का निवेश कर बैठते हैं। जानकारी का अभाव और असावधानी लोगों को ठगी का शिकार बना देती है। उन्होंने नागरिकों को सलाह दी कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, अपनी बैंकिंग या निजी जानकारी किसी के साथ साझा न करें और किसी को भी अपना ओटीपी न बताएं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई प्रावधान नहीं है। यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या किसी अन्य एजेंसी का अधिकारी बताकर डराता है या पैसे मांगता है, तो उसकी बातों में बिल्कुल न आएं और पूरी सावधानी बरतें।