दिल्ली में डीटीसी बस चालकों की हड़ताल का तीसरा दिन, सार्वजनिक परिवहन ठप और यात्रियों को भारी परेशानी

दिल्ली में अनुबंध पर काम कर रहे डीटीसी चालकों की हड़ताल गुरुवार को तीसरे दिन में प्रवेश कर गई। 17 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय राजधानी में इस हड़ताल के कारण सार्वजनिक परिवहन सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं और यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। यह विरोध प्रदर्शन मंगलवार 15 सितंबर 2026 को बुराड़ी ग्राउंड से शुरू हुआ था और अब रानी खेड़ा, राजघाट, नेहरू प्लेस, वजीरपुर, घुम्मनहेड़ा और सरिता विहार सहित कई डिपो तक फैल गया है।
हड़ताल और मुख्य मांगें
डीटीसी कर्मचारी एकता यूनियन के नेतृत्व में प्रदर्शन कर रहे चालक दैनिक मजदूरी 862 रुपये से बढ़ाकर 2,000 रुपये करने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा चिकित्सा सुविधा, सामाजिक सुरक्षा, वार्षिक बोनस, सप्ताह में एक दिन की छुट्टी और 100 किलोमीटर की दैनिक रूट सीमा की मांग भी शामिल है। श्रमिक तीसरे पक्ष के ठेकेदारों के माध्यम से रोजगार के बजाय सीधे डीटीसी में शामिल होने, सरकारी छुट्टियों के भुगतान और 2024 से ठप पड़े महंगाई भत्ते व मूल वेतन में संशोधन की मांग कर रहे हैं। चालक सोनू बेनीवाल ने कहा कि हड़ताल जारी रहेगी क्योंकि मौजूदा वेतन स्कूल की फीस और दैनिक खर्चों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया और बैठक
दिल्ली के परिवहन मंत्री पंकज सिंह ने 16 और 17 सितंबर को चालकों से काम पर लौटने की अपील करते हुए कहा कि वेतन वृद्धि को छोड़कर अधिकांश मांगें स्वीकार कर ली गई हैं, जिसके लिए श्रम विभाग के परामर्श की आवश्यकता है। मंत्री सिंह ने डीटीसी इलेक्ट्रिक बसों का प्रबंधन कर रहे निजी रियायतधारियों को तुरंत शिकायतों का समाधान करने का निर्देश दिया है। हालांकि, यूनियन अध्यक्ष ललित चौधरी ने कहा कि कोई ठोस समाधान पेश नहीं किया गया है। गुरुवार को डीटीसी मुख्यालय में हुई बैठक बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई।
यात्रियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था और सलाह
यात्रियों की भारी भीड़ को संभालने के लिए दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने सुबह 8 बजे से रात 8 बजे के बीच आठ अतिरिक्त ट्रेनें चलाकर अपनी सेवाओं में 20 अतिरिक्त फेरे बढ़ाए हैं। हवाई अड्डा प्राधिकरण ने बस कनेक्टिविटी में संभावित व्यवधानों के संबंध में एक एडवाइजरी जारी की है। छात्र और कम आय वाले श्रमिक महंगे वैकल्पिक परिवहन जैसे ऑटो-रिक्शा और कैब का उपयोग करने के लिए मजबूर हैं।