दिल्ली में अनुबंधक डीटीसी चालकों की हड़ताल शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 को तीसरे दिन में प्रवेश कर गई है। इस हड़ताल के कारण राजधानी में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। 15 सितंबर से शुरू हुए इस प्रदर्शन के चलते डीटीसी की अधिकांश बसें डिपो में ही खड़ी हैं। डीटीसी कर्मचारी एकता यूनियन के अध्यक्ष ललित चौधरी और महासचिव मनोज शर्मा का दावा है कि 90 प्रतिशत बस चालक इस हड़ताल में शामिल हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार 3000 से अधिक बसों को सेवा से हटा दिया गया है।
इस विवाद की मुख्य वजह चालकों की दैनिक मजदूरी को 862 रुपये से बढ़ाकर न्यूनतम 2000 रुपये करने की मांग है।
कर्मी वार्षिक बोनस, ओवरटाइम भुगतान, छुट्टियों में काम करने का मुआवजा, सामाजिक सुरक्षा लाभ और बस के नुकसान पर लगने वाले जुर्माने को हटाने की भी मांग कर रहे हैं। यूनियन प्रतिनिधियों ने जोर देकर कहा कि मौजूदा वेतन रुका हुआ है और महंगाई भत्ते में डेढ़ साल से कोई संशोधन नहीं हुआ है। इसके अलावा 2024 से मूल वेतन वृद्धि भी लंबित है।
दिल्ली के परिवहन मंत्री पंकज कुमार सिंह ने प्रदर्शन समाप्त करने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने बेहतर चिकित्सा सुविधाओं, छुट्टी के नियमों और परिजनों के लिए मृत्यु मुआवजे सहित कई मांगें स्वीकार कर ली हैं। सिंह के अनुसार चिकित्सा बीमा पर सहमति बन गई है और परिवार कवरेज की समीक्षा अभी जारी है। उन्होंने बताया कि वेतन में बढ़ोतरी की मांग मुख्य बाधा बनी हुई है और इस पर श्रम विभाग के साथ और चर्चा की आवश्यकता है।
इस हड़ताल की वजह से रोजाना यात्रा करने वाले यात्रियों, विशेष रूप से कम आय वाले कामगारों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
यात्रियों की भीड़ को संभालने के लिए दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने आठ अतिरिक्त ट्रेनें चलाई हैं और रोजाना 20 फेरे बढ़ाए हैं। इस बीच दिल्ली एयरपोर्ट के अधिकारियों ने कनेक्टिविटी से जुड़ी संभावित समस्याओं को लेकर एडवाइजरी जारी की है। परिवहन डिपो पर पुलिस बल की तैनाती और लाठीचार्ज की खबरों के बीच चालकों का कहना है कि जब तक उनके मुआवजे पर कोई ठोस समझौता नहीं हो जाता, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा।