दिल्ली में ट्रैफिक ई-चालान को कोर्ट में चुनौती देने के लिए 50% जुर्माना जमा करना अनिवार्य

दिल्ली में ट्रैफिक ई-चालान विवाद प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। अब वाहन मालिकों को अदालत में ई-चालान को चुनौती देने से पहले जुर्माना राशि का 50 प्रतिशत जमा करना अनिवार्य कर दिया गया है। यह नीति सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की 20 जनवरी 2026 की अधिसूचना के बाद लाई गई है, जिसे अप्रैल में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की घोषणा के बाद लागू किया गया। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य अदालतों में मुकदमों के बोझ को कम करना है। नए ढांचे के तहत, वाहन चालकों को चालान जारी होने की तारीख से 45 दिनों का समय मिलता है। इस अवधि में उन्हें या तो जुर्माना भरना होगा या एक तय शिकायत निवारण अधिकारी के समक्ष ऑनलाइन चुनौती देनी होगी। इन अधिकारियों में सेक्शन ऑफिसर, खाद्य और आपूर्ति अधिकारी, तहसीलदार और जिला परिवहन अधिकारी शामिल हैं। उप-विभागीय मजिस्ट्रेट और अपर जिला मजिस्ट्रेट इसमें पर्यवेक्षी प्राधिकारी के रूप में कार्य करते हैं। उपराज्यपाल ने इन विवादों को संभालने के लिए इन अधिकारियों को आधिकारिक रूप से अधिसूचित किया है। यदि शुरुआती शिकायत खारिज हो जाती है, तो अपीलकर्ता को मामले को अदालत में आगे ले जाने से पहले जुर्माने का 50 प्रतिशत जमा करना होगा। यदि अदालत यह तय करती है कि चालान गलती से जारी किया गया था, तो जमा किए गए 50 प्रतिशत पैसे वाहन मालिक को पूरी तरह से वापस कर दिए जाएंगे। यदि शुरुआती 45 दिनों के भीतर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है, तो चालान को स्वीकार किया हुआ माना जाएगा। ऐसी स्थिति में अगले 30 दिनों के भीतर भुगतान करना होगा। भुगतान न करने पर वाहन से जुड़ी जरूरी सेवाओं जैसे रोड टैक्स, लाइसेंस नवीनीकरण या वाहन पंजीकरण को निलंबित किया जा सकता है। इस बदलाव को आसान बनाने के लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस अपनी ई-चालान व्यवस्था और कैमरा तकनीक को अपग्रेड कर रही है। नई डिजिटल प्रक्रिया के तहत ई-चालान जारी होने के तीन दिन के भीतर मोबाइल नोटिफिकेशन से भेज दिया जाता है। यदि मोबाइल नंबर रजिस्टर्ड नहीं है, तो 15 दिनों के भीतर भौतिक नोटिस भेजा जाता है। शिकायत अधिकारी जुर्माने की वैधता की जांच के लिए कैमरे की फुटेज जैसे डिजिटल सबूतों की समीक्षा करने के लिए अधिकृत हैं।