दिल्ली सरकार ने ऊंची इमारतों के लिए कड़े किए फायर सेफ्टी नियम, 2026 के नए प्रावधान लागू

दिल्ली सरकार ने राजधानी में ऊंची इमारतों के लिए कड़े अग्निशामक नियम लागू कर दिए हैं। दिल्ली सरकार ने 28 अगस्त 2026 को आधिकारिक तौर पर 'दिल्ली फायर सर्विस (संशोधन) नियम, 2026' की अधिसूचना जारी कर दी है। ये नए मानक शहर के फायर सेफ्टी ढांचे को यूनिफाइड बिल्डिंग बाय-लाॅज (UBBL), 2016 के अनुरूप बनाने के लिए तैयार किए गए हैं। आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) द्वारा संशोधित यूबीबीएल पर औपचारिक अधिसूचना जारी होने के बाद ये नियम लागू होंगे, हालांकि लंबित आवेदनों पर पुरानी व्यवस्था के तहत ही विचार किया जाएगा, जिसकी अधिक जानकारी UNI India की रिपोर्ट में दी गई है।
कड़े नियम और सुरक्षा का नया ढांचा
गृह मंत्री आशिष सूद ने बताया कि इस संशोधन में नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। व्यापक 18-सूत्रीय सुरक्षा ढांचे के तहत दमकल गाड़ियों के लिए न्यूनतम छह मीटर का रास्ता होना अनिवार्य किया गया है ताकि आपातकालीन स्थिति में आसानी से पहुंचा जा सके। नई आवश्यकताओं में फायर लिफ्ट, फायर टावर की स्थापना और विशेष शरण स्थलों तथा फायर चेक फ्लोर का निर्धारण शामिल है। इसके अलावा इमारत मालिकों को फायर-चेक दरवाजे, स्मोक बैरियर, ऑटोमैटिक सप्रेशन सिस्टम और आंतरिक हाइड्रेंट नेटवर्क लगाना होगा।
तकनीक का इस्तेमाल और आपातकालीन व्यवस्था
नई नीति में तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया है। इसके तहत फायर सेफ्टी उपकरणों की 24 घंटे लाइव निगरानी के लिए IoT और क्लाउड तकनीक का उपयोग करने वाले ऑटोमैटिक कंटीन्यूअस मॉनिटरिंग सिस्टम (ACMS) की आवश्यकता होगी। फायर पंप और स्मोक-वेंटिंग सिस्टम सहित महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को अब समर्पित फायर कंट्रोल रूम के माध्यम से प्रबंधित आपातकालीन बिजली आपूर्ति का समर्थन मिलना चाहिए। मालवीय नगर होटल में लगी आग जैसी हाल की त्रासदियों के बाद ये नियम लाए गए हैं, जिसमें 23 लोगों की जान चली गई थी।
विशेष प्रावधान और निरीक्षण प्रक्रिया
इन नए नियमों के तहत दिल्ली फायर सर्विसेज के निदेशक को उन इमारतों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपायों की मांग करने का अधिकार मिल गया है जिनके लिए विशिष्ट प्रावधान स्पष्ट रूप से रेखांकित नहीं हैं। सरकार के पास विशेष क्षेत्रों में इमारतों के लिए आवश्यकताओं में ढיל देने या संशोधित करने का कानूनी विवेक सुरक्षित है। साथ ही आवधिक तीसरे पक्ष के ऑडिट के माध्यम से फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट और एनओसी जारी करने की प्रक्रिया भी जारी रहेगी।