दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की है कि शहर ने अपने तीन प्रमुख लैंडफिल साइटों पर पुराने कचरे के बड़े पैमाने पर प्रसंस्करण के माध्यम से 95 एकड़ जमीन सफलतापूर्वक वापस हासिल कर ली है। इस पहल का उद्देश्य राजधानी के लगातार बने रहने वाले कचरे के पहाड़ों को खत्म करना है। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए ANI News पर देख सकते हैं। सरकारी रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली सरकार और नगर निगम ने ओखला, भलस्वा और गाजीपुर साइटों पर कुल 216 लाख मीट्रिक टन कचरे का प्रसंस्करण किया है। इस वैज्ञानिक रोडमैप की पूरी जानकारी UNI India पर उपलब्ध है।
अकेले ओखला लैंडफिल में 70 लाख मीट्रिक टन कचरे का प्रसंस्करण किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप 35 एकड़ जमीन वापस मिली है। इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट
UNI India पर दी गई है। भलस्वा लैंडफिल में 102 लाख मीट्रिक टन कचरे से 45 एकड़ जमीन मिली है, जबकि गाजीपुर साइट पर 44 लाख मीट्रिक टन कचरे के प्रसंस्करण के बाद 20 एकड़ जमीन वापस मिली है। अधिकारियों ने बताया कि गाजीपुर प्रसंस्करण से मिलने वाली अक्रिय सामग्री का उपयोग वर्तमान में सड़क निर्माण परियोजनाओं और निचले इलाकों को भरने के लिए किया जा रहा है।
भविष्य के कचरे के प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए, दिल्ली सरकार चार नए कचरे से ऊर्जा बनाने वाले संयंत्रों की स्थापना की योजना बना रही है। इन सुविधाओं का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रतिदिन उत्पन्न होने वाला सारा कचरा कुशलता से संसाधित हो, जिससे राष्ट्रीय राजधानी में भविष्य में कचरे के पहाड़ न बन सकें।