दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने मंगलवार को 'दिल्ली स्लम एंड जेजे क्लस्टर रिहैबिलिटेशन एंड रिलोकेशन पॉलिसी 2026' की समीक्षा की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लोगों के लिए आवास और रहने की स्थिति में सुधार करना है। यह नीति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'सभी के लिए सम्मानजनक आवास' के विजन और गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशों के अनुरूप है। इस नीति के तहत पात्रता की कट-ऑफ तारीख को बढ़ाकर 1 जनवरी 2025 कर दिया गया है।
इस योजना में इन-सीटू यानी जहां झुग्गी वहीं मकान के पुनर्विकास, जरूरी नागरिक बुनियादी ढांचे और वैकल्पिक आवास की व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई है। उपराज्यपाल संधू ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे
निवासियों के साथ सीधा संपर्क रखें, उनकी समस्याओं को सुनें और उनका तुरंत समाधान करें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जमीन पर काम दिखना चाहिए और हर परिवार को एक सुरक्षित तथा सम्मानजनक घर मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली के विकास के इस प्रयास में किसी भी पात्र परिवार को पीछे नहीं छोड़ा जाना चाहिए।
यह नीति दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (DUSIB) की जून में हुई 36वीं बोर्ड बैठक के फैसले के बाद आई है, जिसमें आधिकारिक तौर पर 1 जनवरी 2025 की नई कट-ऑफ तारीख तय की गई थी। इस बदलाव का उद्देश्य राजधानी के जेजे क्लस्टर में रहने वाले लगभग
4 से 5 लाख परिवारों यानी लगभग 20 लाख लोगों को फायदा पहुंचाना है, जिससे उन्हें स्थायी और सम्मानजनक आवास मिल सके। पुरानी पात्रता शर्तों के कारण कई परिवार इस सुविधा से बाहर रह गए थे, लेकिन अब नई तारीख आने से अधिक लोगों को इसका लाभ मिल सकेगा।
इस नीति में आंगनवाड़ी केंद्रों, स्कूलों, स्वास्थ्य सुविधाओं, खेल के मैदानों और अन्य बुनियादी ढांचे के विकास के लिए प्रावधान शामिल हैं। साथ ही, परिवारों के विस्तार की वास्तविक स्थिति को भी ध्यान में रखा गया है ताकि भविष्य में किसी प्रकार की असुविधा न हो और लोगों का जीवन स्तर बेहतर हो सके।