दिल्ली सरकार ने प्रदूषण के खिलाफ शुरू किया सात महीने का विशेष जागरूकता अभियान

दिल्ली सरकार ने हवा के प्रदूषण को कम करने और लोगों को जागरूक करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने सात महीने की एक नई योजना शुरू की है जो सितंबर 2026 से मार्च 2027 तक चलेगी। यह अभियान वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग यानी CAQM के निर्देशों के बाद शुरू किया गया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य एजेंसी के कर्मचारियों को यह बताना है कि टूटी हुई सड़कें और कचरे के ढेर शहर के प्रदूषण को कैसे बढ़ाते हैं। पीआईबी की विज्ञप्ति के अनुसार यह प्रयास हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे उत्तरी राज्यों में चल रही पर्यावरण रणनीतियों के साथ मेल खाता है। इस बारे में अधिक जानकारी पीआईबी रिलीज में दी गई है।
कड़े नियम और नीतियां लागू
दिल्ली वायु प्रदूषण न्यूनीकरण कार्ययोजना 2026 के तहत सरकार ने बिना पीयूसी ईंधन न मिलने की नीति को सख्ती से लागू किया है। इसके अलावा 1 नवंबर से 31 जनवरी तक भारत स्टेज छह यानी बीएस-सिक्स मानक पूरी न करने वाले कमर्शियल वाहनों के प्रवेश पर रोक रहेगी। यह पहल 'स्वच्छ हवा, स्वस्थ दिल्ली' कार्यक्रम के तहत समर्थित है जो सितंबर 2026 से अगस्त 2033 तक चलने वाली सात साल की परियोजना है। इस पर करीब 8300 करोड़ रुपये खर्च होंगे जिसमें से 65 प्रतिशत राशि विश्व बैंक दे रहा है।
अधिकारियों और जनता की भागीदारी
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि पर्यावरण की रक्षा सरकार की नीतियों में सबसे ऊपर है। वहीं पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सरसा ने वैज्ञानिक तरीकों से हवा की गुणवत्ता में सुधार होने की बात कही है। दिल्ली विकास प्राधिकरण और नगर निगम जैसे विभाग निवासियों, औद्योगिक संघों और छात्रों के लिए कार्यशालाएं आयोजित करेंगे। इस योजना में निर्माण श्रमिकों के लिए हर महीने धूल नियंत्रण का प्रशिक्षण और कचरा फैलाने से रोकने के लिए स्थानीय निकायों द्वारा साप्ताहिक अभियान चलाना शामिल है। ये सभी कदम 25 अगस्त 2026 को गाजियाबाद के लोनी में बिना अनुमति चल रहे 16 औद्योगिक यूनिटों को सील करने की कार्रवाई के बाद उठाए गए हैं।