दिल्ली हाईकोर्ट ने टिल्लू गैंग के कथित मुख्य गुर्गे अमित की अग्रिम अंतरिम जमानत पर रोक लगा दी है। यह रोक न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया द्वारा 25 अगस्त 2026 को जारी आदेश के तहत लगाई गई है। इस आदेश ने राऊज एवेन्यू जिला अदालत के विशेष जज द्वारा 17 अगस्त 2026 को दी गई राहत को रोक दिया है। विशेष अदालत ने अमित को 10 सितंबर से 8 अक्टूबर 2026 की अवधि के लिए अंतरिम जमानत देने का विचार किया था।
अमित 21 जुलाई 2020 को अपनी पहली गिरफ्तारी के बाद से हिरासत में है।
वह वर्तमान में हत्या, हत्या का प्रयास, जबरन वसूली और मकोका तथा आर्म्स एक्ट के तहत 15 आपराधिक मामलों का सामना कर रहा है। उसे पहले पत्नी की गर्भावस्था के कारण 4 जून 2026 को 10 दिन की अंतरिम जमानत दी गई थी। इस व्यवस्था को भारी सुरक्षा खतरों और भागने के जोखिम के कारण लगभग 40 कर्मियों की चौबीस घंटे पुलिस निगरानी सहित कड़ी शर्तों के तहत कई बार बढ़ाया गया था।
राज्य का प्रतिनिधित्व कर रहे अतिरिक्त लोक अभियोजक (एपीपी) अमन उस्मान ने निचली अदालत के फैसले को सफलतापूर्वक चुनौती दी।
उन्होंने तर्क दिया कि भविष्य की तारीख से प्रभावी अंतरिम जमानत देना कानूनी रूप से अस्थिर और प्रक्रियागत रूप से अनियमित था। अदालत ने सह-आयुक्त हिम्मत से जुड़े मामले का भी संज्ञान लिया, जिसे चिकित्सा आधार पर दी गई अंतरिम जमानत का उल्लंघन करने के बाद 24 मार्च 2026 को भगोड़ा घोषित कर दिया गया था। न्यायमूर्ति कठपालिया ने फैसला सुनाया कि सुनवाई की अगली तारीख तक विवादित आदेश का संचालन रुका रहेगा। दिल्ली हाईकोर्ट ने राज्य की चुनौती पर औपचारिक जवाब दाखिल करने के लिए अमित के वकील को दो सप्ताह का समय दिया है।