दिल्ली हाईकोर्ट बुधवार, 16 सितंबर 2026 को दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ (DUSU) की चुनाव प्रक्रिया को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करेगा। यह मामला मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ के समक्ष लाया गया, जिसके बाद सोमवार, 14 सितंबर 2026 को तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया गया था। यह याचिका दिल्ली यूनिवर्सिटी की एक छात्रा विजेता द्वारा वकीलों स्नेह वर्धन और प्रतिभा सिन्हा के माध्यम से दायर की गई है।
याचिका में 13 अगस्त के चुनाव नोटिफिकेशन और 11 सितंबर के उस नोटिस को रद्द करने की मांग की गई है, जिसमें अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के पदों के लिए उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया था।
याचिकाकर्ता ने चुनावी प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने का अनुरोध करते हुए तर्क दिया कि हस्तक्षेप न करने पर एक अपरिवर्तनीय स्थिति पैदा हो जाएगी।PIL में छात्र चुनावों के संबंध में लिंगदोह समिति की सिफारिशों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के गंभीर उल्लंघनों का आरोप लगाया गया है। याचिका में विशेष रूप से लिंगदोह समिति के ढांचे के खंड 6.3 का हवाला दिया गया है, जिसमें यह अनिवार्य है कि छात्र चुनाव राजनीतिक दलों से स्वतंत्र रहने चाहिए।
याचिका में तर्क दिया गया है कि एनएसयूआई, आइसा-एसएफआई, एएसएपी और एबीवीपी सहित राजनीतिक संगठनों ने इन मानदंडों के प्रत्यक्ष उल्लंघन में अपने उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं। इसके अलावा, याचिका में DUSU संविधान के खंड 6(i) और 6(ii) की वैधता को चुनौती दी गई है, जिसमें दावा किया गया है कि वे सुप्रीम कोर्ट के 2006 के फैसले और स्थापित लिंगदोह समिति के दिशानिर्देशों के असंगत हैं।
वर्तमान में DUSU चुनाव 18 सितंबर 2026 को निर्धारित हैं, और वोटों की गिनती 19 सितंबर 2026 को होनी तय है।
इस मामले में भारत संघ और अन्य को प्रतिवादी बनाया गया है।