दिल्ली हाईकोर्ट ने नाबालिग गैंगरेप मामले में एससी/एसटी एक्ट के तहत अतिरिक्त आरोप तय करने का दिया निर्देश

Kittu Kumari18 September 20262 min read11 viewsDelhi Local
दिल्ली हाईकोर्ट ने नाबालिग गैंगरेप मामले में एससी/एसटी एक्ट के तहत अतिरिक्त आरोप तय करने का दिया निर्देश

मुख्य बातें और परिचय

दिल्ली हाईकोर्ट ने 2016 के नाबालिग स्कूली छात्रा के कथित गैंगरेप मामले में एक आरोपी के खिलाफ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत अतिरिक्त आरोप तय करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया सामग्री से यह पता चलता है कि आरोपी पीड़िता की जाति की पहचान से अवगत था। यह फैसला ANI के इनपुट पर आधारित है।

फैसले से जुड़े मुख्य बिंदु

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न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी ने 17 सितंबर को सुनाए गए अपने फैसले में 2017 की ट्रायल कोर्ट के आदेश को आंशिक रूप से संशोधित किया। अदालत ने मामले के एक आरोपी के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1)(w) के तहत अतिरिक्त आरोप तय करने का निर्देश दिया है।ट्रायल कोर्ट के बाकी आदेश को बरकरार रखा गया है। यह अदालत पीड़िता द्वारा कड़कड़डूम कोर्ट्स के पोक्सो (POCSO) अधिनियम के विशेष न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पीड़िता ने मामले में अन्य धाराएं जोड़ने की मांग की थी।

घटना का विवरण

मामले के अनुसार, 31 मार्च 2016 को नाबालिग अपनी कक्षा 10 का परिणाम लेने स्कूल गई थी, जहां से आरोपी तरुण उसे उस्मानपुर के 5वें पुश्ता क्षेत्र में ले गया। इसके बाद आरोपी सुमित डेढ़ा उर्फ शानु कार में आया और पीड़िता को नोएडा ले जाया गया, जहां उसके साथ कथित तौर पर बलात्कार किया गया और घटना का खुलासा न करने की धमकी दी गई। हाईकोर्ट ने कहा कि पीड़िता ने धारा 164 के तहत अपने बयान में इन आरोपों को दोहराया था।

अदालत की टिप्पणियां और निष्कर्ष

अदालत ने कहा कि एससी/एसटी अधिनियम का उद्देश्य अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों को जातिगत अपमान और अत्याचार से बचाना है। अदालत ने माना कि आरोपी और पीड़िता एक ही इलाके में रहते थे और एक-दूसरे से परिचित थे, जिससे जाति की जानकारी का अनुमान लगाया जा सकता है।हालांकि, अदालत ने सह-आरोपियों के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के अन्य प्रावधानों और पोक्सो की धारा 14(3) व आईपीसी की धारा 328 के तहत आरोप बढ़ाने से इनकार कर दिया।

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