दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, MCD के पंजाबी शिक्षकों का 30 साल पुराना वेतन विवाद खत्म

Kittu Kumari29 August 20262 min read130 viewsDelhi Local
दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, MCD के पंजाबी शिक्षकों का 30 साल पुराना वेतन विवाद खत्म

दिल्ली हाईकोर्ट ने नगर निगम (MCD) स्कूलों के पार्ट-टाइम पंजाबी शिक्षकों के वेतन को लेकर चल रही 30 साल पुरानी कानूनी लड़ाई को आखिरकार खत्म कर दिया है। 29 अगस्त 2026 को मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस सिंह वर्मा की पीठ ने पंजाबी अकादमी और दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय की अपीलों को खारिज कर दिया। अदालत ने न्यायमूर्ति ज्योति सिंह के 15 जुलाई 2025 के फैसले को सही ठहराया है। अदालत ने साफ कहा कि कार्यपालिका वैधानिक कानूनों को ओवरराइड नहीं कर सकती और कानूनी रूप से तय न्यूनतम वेतन से कम भुगतान करने वाला कोई भी रोजगार अनुबंध अवैध है। अदालत ने पंजाबी अकादमी को निर्देश दिया कि वह शिक्षकों का वेतन नियमित पूर्णकालिक सहायक या प्राथमिक शिक्षकों के वेतनमान के 50 प्रतिशत पर तय करे। यह अधिकार दिल्ली स्कूल शिक्षा नियम, 1973 के नियम 101(2) के तहत दिया गया है। पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 14 और 23 का हवाला देते हुए दशकों से इन शिक्षकों को न्यूनतम वेतन से कम भुगतान करने की प्रथा को मनमाना और शोषक बताया है।

योग्यता और न्यूनतम वेतन पर अदालत का फैसला

अदालत ने शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता को लेकर किए गए दावों को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत 23 अगस्त 2010 को जारी अधिसूचना में उस तारीख से पहले नियुक्त शिक्षकों को नई योग्यता आवश्यकताओं से छूट दी गई थी। अदालत ने शिक्षकों के पिछले वेतन की तुलना दिल्ली श्रम विभाग की सितंबर 2024 की अधिसूचना से की, जिसमें अकुशल श्रमिक का न्यूनतम मासिक वेतन 18,066 रुपये तय किया गया था।

वेतन निर्धारण और आदेश का पालन

अदालत ने निर्देश दिया है कि 24 अगस्त 2026 से आठ सप्ताह के भीतर एकल पीठ के जुलाई 2025 के आदेश का पूरी तरह से पालन किया जाना चाहिए। इस कानूनी कार्यवाही में अपीलकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता नौशाद अहमद खान, प्रतिवादी शिक्षकों की ओर से अधिवक्ता निष्ठा गर्ग और एमसीडी का प्रतिनिधित्व स्थायी वकील तुषार सन्नु ने किया।

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