दिल्ली हाईकोर्ट ने फॉरेसिक ऑडिट का आदेश दिया है। यह आदेश जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की बेंच ने दिया है। मामला फोर्टिस हेल्थकेयर के पूर्व प्रमोटर मलविंदर मोहन सिंह और शिविंदर मोहन सिंह से जुड़ा है। यह कार्रवाई जापानी फार्मा कंपनी दाइची सांक्यो की याचिका पर हो रही है। दाइची सांक्यो कंपनी करीब 4.6 अरब डॉलर यानी लगभग 5,300 करोड़ रुपये का आर्बिट्रेशन अवार्ड वसूल करना चाहती है। अदालत ने एस रामानंद अय्यर एंड कंपनी को ऑडिट की जिम्मेदारी सौंपी है। इस ऑडिट का उद्देश्य यह पता लगाना है कि अवार्ड के लिए तय संपत्तियों को कैसे कम किया गया और इसमें कौन-कौन शामिल था।
कोर्ट के आदेश के अनुसार, इस ऑडिट में फोर्टिस हेल्थकेयर लिमिटेड के शेयरों और 17 वित्तीय संस्थानों के बीच हुए ट्रांजैक्शन की जांच होगी। इन वित्तीय संस्थानों में एचडीएफसी लिमिटेड, यस बैंक और एक्सिस बैंक शामिल हैं।
इन बैंकों पर आरोप है कि उन्होंने कोर्ट के पुराने आदेशों का उल्लंघन करके फोर्टिस के शेयरों को बेचा है। इसके अलावा, साल 2018 में मलेशिया की कंपनी आईएचएच हेल्थकेयर बेरहाड द्वारा फोर्टिस में 4,000 करोड़ रुपये में 31 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने के मामलों की भी जांच की जाएगी। सिंगापुर की आरएचटी हेल्थ ट्रस्ट से जुड़े 4,666 करोड़ रुपये के ट्रांसफर की भी पड़ताल होगी। इस बारे में अधिक जानकारी
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अदालत ने पाया कि सितंबर 2016 से सितंबर 2017 के बीच फोर्टिस हेल्थकेयर होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड के पास मौजूद तीन करोड़ से ज्यादा शेयर कम किए गए थे। यह सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का उल्लंघन था जिसमें शेयर होल्डिंग की स्थिति को बनाए रखने को कहा गया था।
इससे पहले सितंबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने सिंह बंधुओं को इन आदेशों का उल्लंघन करने का दोषी ठहराया था। ताजा जांच में सिंह बंधुओं और रेलिगेयर ग्रुप के बीच हुए वित्तीय लेन-देन की भी जांच की जा रही है।