दिल्ली हाईकोर्ट ने बच्चा तस्करी मामले में खारिज की जमानत, पुलिस जांच पर उठाए गंभीर सवाल

दिल्ली हाईकोर्ट ने बच्चा तस्करी के एक मामले में आरोपी राजकुमार की नियमित जमानत अर्जी को 1 सितंबर 2026 को खारिज कर दिया है। अदालत ने इस मामले में पुलिस जांच की तीखी आलोचना की है। अदालत ने दिल्ली पुलिस के काम करने के तरीके को बेहद चौंकाने वाला बताया है और कहा है कि पुलिस ने गिरफ्तारियों में चुनिंदा रवैया अपनाया है, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता और जिसकी निंदा की जानी चाहिए। इस मामले की विस्तृत जानकारी के लिए एएनआई की रिपोर्ट देख सकते हैं। यह पूरा मामला नांगलोई पुलिस थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 370 और 34 तथा किशोर न्याय अधिनियम की धारा 81 के तहत दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। इसमें एक छोटी बच्ची की तस्करी का आरोप लगाया गया है। अदालत की कार्यवाही के अनुसार, आरोपी राजकुमार और एक अन्य सह-आरोपी गायत्री पर पति-पत्नी होने का नाटक करके बच्ची को गोद लेने और बाद में उसे दीपिका नाम के व्यक्ति को बेचने का आरोप है। एफआईआर दर्ज होने के बाद दो साल बीत चुके हैं, लेकिन पीड़ित बच्ची का अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है और उसे बरामद नहीं किया जा सका है। न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि सह-आरोपी डॉ. कुलविंदर कौर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। अदालत ने नोट किया कि अधिकारियों ने डॉ. कौर की गिरफ्तारी के लिए व्यावहारिक रूप से कोई कदम नहीं उठाया है। अदालत की इस कड़ी पूछताछ के जवाब में राज्य सरकार ने आश्वासन दिया है कि वह डॉ. कौर की गिरफ्तारी सुनिश्चित करेगी। इसके अलावा, अदालत ने पुलिस उपायुक्त को निर्देश दिया है कि वे पीड़िता की बरामदगी को प्राथमिकता दें और चार सप्ताह के भीतर जांच पर एक व्यापक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करें। अदालत के आदेश की एक प्रति तुरंत समीक्षा के लिए संबंधित पुलिस उपायुक्त को भेज दी गई है।