शूरवीर गाना विवाद: दिल्ली हाईकोर्ट ने सेंसर बोर्ड को एक हफ्ते में फैसला लेने का दिया निर्देश

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) को एक सप्ताह के भीतर फैसला लेने का निर्देश दिया है। यह निर्देश 'मिर्जापुर द मूवी' के निर्माताओं के उस प्रस्ताव पर दिया गया है, जिसमें फिल्म के क्लाइमेक्स से ‘शूरवीर’ गाने को हटाकर उसकी जगह बैकग्राउंड म्यूजिक का इस्तेमाल करने की बात कही गई है। यह जनहित याचिका प्रशांत कुमार सिंह द्वारा दायर की गई थी, जिसमें फिल्म से इस गाने को हटाने या किसी अन्य स्कोर से बदलने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि रैपेरिया बालम द्वारा रचित ‘शूरवीर’ गाना साल 2020 में महाराणा प्रताप को श्रद्धांजलि के रूप में रिलीज किया गया था।
याचिका में उठाए गए मुख्य बिंदु
याचिका के अनुसार, गाने में मेवाड़, चेतक, सम्मान, बलिदान, मातृभूमि की रक्षा और महाराणा प्रताप की विरासत का जिक्र है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि फिल्म में संगठित अपराध, गैंगवार, हिंसा, अवैध हथियार, ड्रग्स, हत्या और अन्य आपराधिक गतिविधियों को दिखाया गया है और इस सीक्वेंस में गाने का इस्तेमाल किया गया है। याचिकाकर्ता ने चिंता जताई है कि ऐसे माहौल में गाने के इस्तेमाल से महाराणा प्रताप से जुड़े आदर्शों और फिल्म के किरदारों के बीच अवांछित मेल बन सकता है। हालांकि, याचिकाकर्ता ने यह साफ किया है कि वह सिनेमा में अपराध या गैंगस्टर किरदारों के फिल्मांकन को चुनौती नहीं दे रहा है।
कानूनी प्रावधान और अदालत की सुनवाई
यह याचिका सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 की धारा 5बी और लागू फिल्म प्रमाणन दिशानिर्देशों पर आधारित है। याचिका में सामाजिक विरोधी गतिविधियों के महिमामंडन से जुड़े प्रावधानों का विशेष रूप से हवाला दिया गया है। गुरुवार की सुनवाई के दौरान निर्माताओं के वकील ने अदालत को बताया कि इस गाने का इस्तेमाल क्लाइमेक्स में दो गुटों के बीच लड़ाई के दौरान बैकग्राउंड म्यूजिक के रूप में किया गया था और इसे किसी पात्र द्वारा नहीं गाया गया है। अदालत को यह भी बताया गया कि निर्माता सिनेमैटोग्राफ (प्रमाणन) नियम, 2024 के नियम 31 के तहत CBFC के पास पहले ही पहुंच चुके हैं। CBFC ने अदालत को बताया कि वह इस प्रस्ताव पर विचार करेगा और एक हफ्ते के भीतर फैसला लेगा।