दिल्ली सरकार ने महिला एवं बाल विकास विभाग, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और शिक्षा विभाग के साथ मिलकर प्ले स्कूलों के संचालन के लिए कड़े नियम लागू किए हैं। यह कदम बच्चों की सुरक्षा, स्वच्छता और दो साल से कम उम्र के बच्चों के दाखिले को लेकर उठाई गई चिंताओं के बाद उठाया गया है। अब सभी प्ले स्कूलों को औपचारिक रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी करनी होगी। आवेदकों को महिला एवं बाल विकास विभाग की वेबसाइट से सेल्फ-डिक्लेरेशन और रजिस्ट्रेशन फॉर्म डाउनलोड करना होगा, जिसे जिला कार्यालयों में ईमेल और हार्ड कॉपी के माध्यम से जमा करना अनिवार्य है। आवेदन में छात्रों की संख्या, कक्षाओं की गिनती, शिक्षक-छात्र अनुपात और पैंट्री तथा खेल क्षेत्रों का विवरण देना होगा। स्कूलों को बच्चों के अनुकूल शौचालय, साबुन, तौलिए, वॉशबेसिन, आग से सुरक्षा के उपाय, सीसीटीवी कैमरे, फर्स्ट-एड किट और शिक्षण सामग्री की जानकारी देनी होगी।
स्कूलों को अपने शिक्षकों की शैक्षणिक और पेशेवर योग्यता, उनकी कक्षाओं और नियुक्ति की तारीखों का रिकॉर्ड रखना होगा। पिछले तीन सालों के वित्तीय खुलासे और संचालन करने वाली सोसायटी या संगठन की जानकारी देना भी अनिवार्य किया गया है। महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला अधिकारी इन दिशा-निर्देशों की जांच के लिए मौके पर निरीक्षण करेंगे और इसके बाद अंतिम मंजूरी या अस्वीकृति के लिए मुख्यालय को रिपोर्ट भेजेंगे।
जुलाई 2026 में घोषित एक अलग नीतिगत फैसले में, दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने निजी स्कूलों के नियमों को आसान बनाने के लिए सुधार पेश किए।
इन बदलावों के तहत 'एसेंशियलिटी सर्टिफिकेट' प्रक्रिया को समाप्त करके सेल्फ-डिक्लेरेशन प्रणाली लागू की गई है। दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम और नियम (DSER), 1973 के नियम 50(ii) के तहत किसी क्षेत्र में नए स्कूल की 'वास्तविक जरूरत' का आकलन करने की पुरानी शर्त को खत्म कर दिया गया है। इसके अलावा, दिल्ली के घनी आबादी वाले इलाकों को ध्यान में रखते हुए जमीन के आकार के नियमों में ढील दी गई है। अब मान्यता सीधे तौर पर आरटीई अधिनियम 2009 के पालन से जोड़ी गई है, जिसमें बुनियादी ढांचा, शिक्षक योग्यता और सुरक्षा नियम शामिल हैं। हालांकि इन सुधारों से आरटीई अधिनियम का पालन सुनिश्चित करने की बात कही गई है, लेकिन कार्यकर्ताओं ने सार्वजनिक स्कूली ढांचे पर इसके असर और निजीकरण को बढ़ावा मिलने को लेकर चिंता जताई है।