दिल्ली कोर्ट ने 2025 लाल किले धमाके मामले में एनआईए की 7,500 पन्नों की चार्जशीट पर लिया संज्ञान

दिल्ली की एक अदालत ने 29 अगस्त 2026 को लाल किले पर 10 नवंबर 2025 को हुए धमाके के मामले में एनआईए की चार्जशीट पर संज्ञान लिया है। इस मामले में मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं: एनआईए की 7,500 पन्नों की चार्जशीट पर विशेष न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने सुनवाई की, इस हमले में 11 लोगों की मौत और कई लोग घायल हुए थे, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की रिपोर्ट में इसे अल-क्वाइदा से जुड़ा बताया गया है, मामले की अगली सुनवाई 9 सितंबर को तय की गई है।
चार्जशीट में 13 लोगों के नाम शामिल
इस चार्जशीट में कुल 13 लोगों के नाम शामिल हैं, जिनमें 14 मई 2026 की शुरुआती फाइलिंग और 27 जून 2026 की पूरक चार्जशीट के तीन संदिग्ध शामिल हैं। आरोपियों में आमिर राशिद मीर, जासिर बिलाल वानी, डॉ. मुजामिल शकील, डॉ. अदील अहमद राथर, डॉ. शाहीन सईद, मुफ्ती इरफान अहमद वागे, सोयब, डॉ. बिलाल नजीर मल्ला, यासिर अहमद डार, जमीर अहमद अहंगर, तुफायल अहमद भट और मुजफ्फर अहमद शामिल हैं। मुजफ्फर अहमद एक फरार बाल रोग विशेषज्ञ और आतंकी मॉड्यूल का संस्थापक सदस्य बताया गया है। मुख्य साजिशकर्ता डॉ. उमर उन नबी की धमाके में मौत हो चुकी है, जिसके खिलाफ कार्यवाही बंद करने का प्रस्ताव है।
एनआईए के आरोप और जांच के विवरण
एनआईए की ओर से विशेष लोक अभियोजक माधव खुराना, त्रिशा मित्तल और अनिल डबास ने दलीलें दीं। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि आरोपी कश्मीर में बने अल-क्वाइदा के संगठन अंसार गजवत-उल-हिंद से जुड़े थे। समूह ने भारत सरकार को उखाड़ फेंकने और शरिया कानून लागू करने के लिए 'ऑपरेशन हेवनली हिंद' शुरू किया था। जांच में 588 गवाहों के हवाले से टीएटीपी विस्फोटकों, अवैध एके-47 और क्रिंककोव राइफलों के इस्तेमाल तथा ड्रोन-माउंटेड आईईडी के प्रयोग का जिक्र है। मुजफ्फर अहमद पर फरीदाबाद के अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े एक ठिकाने पर विस्फोटक बनाने और उनका परीक्षण करने का आरोप है।
कानूनी धाराएं और पेशी
इस मामले में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम, भारतीय न्याय संहिता, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, शस्त्र अधिनियम और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम के तहत आरोप तय किए गए हैं। सुनवाई के दौरान सभी आरोपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए।