दिल्ली की द्वारका कोर्ट ने शनिवार को कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका पर फैसला टाल दिया है। यह मामला सोनिया गांधी का नाम मतदाता सूची में शामिल किए जाने से जुड़ा है। अब इस मामले की अगली सुनवाई और आदेश के लिए 21 सितंबर की तारीख तय की गई है (ANI News)। इस याचिका को अधिवक्ता विकास त्रिपाठी ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देते हुए दाखिल किया था जिसमें एफआईआर की मांग को खारिज कर दिया गया था।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि सोनिया गांधी का नाम 1980 में मतदाता सूची में शामिल किया गया था, जबकि रिकॉर्ड के अनुसार उन्होंने अप्रैल 1983 में भारत की नागरिकता प्राप्त की थी।
वकील विकास त्रिपाठी का तर्क है कि इस तरह नाम शामिल होना प्रक्रिया में लापरवाही या गलत जानकारी को दर्शाता है। दूसरी ओर, सोनिया गांधी की कानूनी टीम, जिसका नेतृत्व वरिष्ठ अधिवक्ता आर.एस. चीमा और अधिवक्ता तरन्नुम चीमा कर रहे हैं, ने इन सभी आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है।
स्पेशल जज विशाल गोगने ने इस मामले में 25 जुलाई को ही अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। हालांकि, जज गोगने के ट्रांसफर हो जाने के कारण तय तारीख पर फैसला नहीं सुनाया जा सका। इस कार्यवाही के संबंध में दिल्ली पुलिस को भी नोटिस जारी किए गए हैं, क्योंकि अदालत यह समीक्षा कर रही है कि क्या चुनावी विवादों पर संवैधानिक सीमाओं को देखते हुए न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता है (
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