दिल्ली दंगा मामला: कोर्ट ने 12 आरोपियों को किया बरी, गवाह मुकरे

Kittu Kumari31 August 20262 min read121 viewsDelhi Local
दिल्ली दंगा मामला: कोर्ट ने 12 आरोपियों को किया बरी, गवाह मुकरे

दिल्ली की कड़कड़डूमा सत्र अदालत ने साल 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान मुरसलीन नाम के व्यक्ति की हत्या के मामले में 12 आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत ने 25 अगस्त 2026 के अपने आदेश में लोकेश सोलंकी, पंकज शर्मा, अंकित चौधरी, प्रिंस, जतिन शर्मा, हिमांशु ठाकुर, विवेक पांचाल, ऋषभ चौधरी, सुमित चौधरी, टिंकू अरोड़ा, संदीप और साहिल को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। मृतक का शव 28 फरवरी 2020 को जोहरीपुर तिराहा के पास एक नाले से बरामद हुआ था।

अदालत का यह फैसला उस सुनवाई के बाद आया जिसमें मुख्य अभियोजन गवाह राज्य के मामले का समर्थन करने में विफल रहे। प्रमुख गवाह दिवेश राजपूत अपने बयान से मुकर गए, जबकि दूसरे गवाह निसार अहमद आरोपियों के खिलाफ हिंसा का कोई विशिष्ट कृत्य साबित नहीं कर सके।

अदालत का फैसला और कानूनी पहलू

अदालत ने फैसला सुनाया कि अभियोजन पक्ष व्यक्तिगत आपराधिक दायित्व साबित करने में असफल रहा। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल भीड़ का हिस्सा होने मात्र से और विशिष्ट अवैध कृत्यों के सबूत के बिना अपराध साबित नहीं किया जा सकता है। जज प्रवीण सिंह ने जोर देकर कहा कि आईपीसी की धारा 144 के तहत आपराधिक दायित्व के लिए गैरकानूनी सभा का हिस्सा रहते हुए व्यक्ति के अपने कृत्य का प्रमाण होना आवश्यक है।

यह फैसला 27 अगस्त 2026 को आए एक अन्य बरी करने वाले आदेश के बाद आया है, जिसमें 2020 के दंगों के दौरान एक कबाड़ी की हत्या के मामले में 13 अलग-अलग व्यक्तियों को बरी किया गया था। उस मामले में अदालत ने टिप्पणी की थी कि 'जय सिया राम' या 'हर हर महादेव' जैसे धार्मिक नारे लगाना कोई आपराधिक अपराध नहीं है, जब तक कि ऐसे काम कानून का उल्लंघन न करें। कबाड़ी मामले के आरोपियों को भले ही बरी कर दिया गया हो, लेकिन हिमांशु ठाकुर को आईपीसी की धारा 411 के तहत चोरी की संपत्ति यानी पीड़ित का मोबाइल फोन रखने के जुर्म में दोषी ठहराया गया।

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