दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में मुफ्त इलाज के दावों की खुली पोल, मरीजों पर पड़ रहा भारी आर्थिक बोझ

Kittu Kumari31 August 20262 min read97 viewsDelhi Local
दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में मुफ्त इलाज के दावों की खुली पोल, मरीजों पर पड़ रहा भारी आर्थिक बोझ

दिल्ली के सरकारी अस्पताल दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट (DSCI) में मुफ्त इलाज के दावों के बावजूद मरीजों को अपनी जेब से बहुत पैसा खर्च करना पड़ रहा है। द इंडियन एक्सप्रेस की 31 अगस्त 2026 की एक रिपोर्ट के अनुसार, अस्पताल में जरूरी मशीनों की कमी और जांच सेवाएं न मिलने के कारण मरीजों को बाहर प्राइवेट सेंटरों में जाना पड़ रहा है। मरीजों के परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

सबरा नाम की 48 साल की एक मरीज ने पिछले दो साल में सिर्फ ट्रैस्टुजुमाब दवा पर 1.2 लाख रुपये से ज्यादा खर्च किए हैं। उन्हें यह दवा बाहर से हर महीने 4,000 से 5,000 रुपये में खरीदनी पड़ रही है। जुलाई में उन्होंने एक प्राइवेट सेंटर पर पेट-स्कैन के लिए 12,000 रुपये दिए क्योंकि अस्पताल की जांच यूनिट बंद थी। एक अन्य परिवार ने आईसीयू में 12 दिन रहने के लिए 4 लाख रुपये से ज्यादा खर्च किए, जिसमें पेट-स्कैन और डायलिसिस के 60,000 रुपये भी शामिल हैं। अस्पताल में मशीनों और स्टाफ की भारी कमी है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले भी इस अस्पताल की आलोचना की है और 2017 में खरीदे गए 15.42 करोड़ रुपये के पेट साइक्लोट्रॉन मशीन के इस्तेमाल न होने को जनता के पैसे की बर्बादी बताया है। यह मशीन चलाने वाले ट्रेंड लोग न होने और मंजूरी न मिलने की वजह से बंद पड़ी है। इसके अलावा, अस्पताल में करीब 500 पद खाली पड़े हैं। मरीजों को जांच के लिए लंबी लाइन और महीनों इंतजार करना पड़ रहा है।

मरीजों को सीटी स्कैन के लिए दो महीने से ज्यादा और अल्ट्रासाउंड के लिए करीब एक महीने का इंतजार करना पड़ रहा है। कई मामलों में तो रेडियोथेरेपी की तारीख अगले साल की दी जा रही है। दिल्ली आरोग्य कोष, आयुष्मान भारत (PMJAY) और स्वास्थ्य मंत्री कैंसर रोगी कोष जैसी योजनाएं होने के बावजूद अस्पताल की कमियों के कारण मरीजों का खर्च बढ़ रहा है।

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