दिल्ली की हवा हुई खराब, प्रदूषण का स्तर बढ़ने से अगस्त के आखिरी दिनों में वायु गुणवत्ता पहुंची 'खराब' श्रेणी में

दिल्ली में 30 अगस्त 2026 को हवा की गुणवत्ता गिरकर 'खराब' श्रेणी में पहुंच गई है। निगरानी रिपोर्टों में अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं, जो 109 से 520 के बीच दर्ज किए गए हैं, जिसमें 520 का आंकड़ा 'गंभीर' स्तर पर पहुंच गया है। नई दिल्ली के वर्तमान विशिष्ट आंकड़ों के अनुसार, पीएम2.5 का स्तर 25 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर, पीएम10 का स्तर 114, ओजोन सांद्रता 17 पीपीबी और एनओ2 का स्तर 23 पीपीबी दर्ज किया गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के डेटा के अनुसार, शनिवार 29 अगस्त 2026 को दोपहर 4 बजे शहर का 24 घंटे का औसत एक्यूआई 130 दर्ज किया गया था, जबकि शुक्रवार को यह 128 था।
अन्य शहरों में प्रदूषण का हाल
देश के अन्य प्रमुख शहरों में वायु गुणवत्ता के आंकड़े अलग-अलग दर्ज किए गए हैं। नोएडा में एक्यूआई का स्तर 114 से 123 के बीच, गुरुग्राम में 83 से 150, फरीदाबाद में 153 और लखनऊ में 62 से 102 के बीच रहा। इसके अलावा, मुंबई में 37 से 64, बेंगलुरु में 70 से 72, पुणे में 53, अहमदाबाद में 68, चंडीगढ़ में 74, चेन्नई में 72, हैदराबाद में 30 और कोलकाता में 49 एक्यूआई दर्ज किया गया।
मानसून की स्थिति और बारिश के आंकड़े
अगस्त महीने में अत्यधिक बारिश होने के बावजूद, जिसमें सफदरजंग वेधशाला में 354.1 मिलीमीटर यानी 59 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई, महीने के पहले 28 दिनों का औसत एक्यूआई 92 रहा, जो 2023 के बाद से सबसे अधिक है। ऊर्जा और स्वच्छ वायु अनुसंधान केंद्र (CREA) का मानना है कि यह कमजोर होती मानसूनी स्थितियों के कारण है जो प्रदूषकों को सतह के पास फंसा लेती हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 30 और 31 अगस्त को आंशिक रूप से बादल छाए रहने का अनुमान जताया है, और 1 सितंबर तक हल्की बारिश या बूंदाबांदी फिर से शुरू होने की उम्मीद है।
दिल्ली सरकार की कार्ययोजना और पिछले आंकड़े
इस स्थिति के जवाब में, दिल्ली सरकार ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) को एक सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) योजना सौंपी है। इस पहल में 50 जागरूकता गतिविधियां शामिल हैं, जिनमें सामुदायिक वॉकशॉप और स्कूलों तथा रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों के लिए कार्यशालाएं शामिल हैं। अक्टूबर से दिसंबर 2026 के बीच 20 कार्यक्रम निर्धारित हैं। यह कार्रवाई 2025 की एक रिपोर्ट के बाद आई है जिसमें दिल्ली को दुनिया का चौथा सबसे प्रदूषित शहर बताया गया था, जहां वार्षिक औसत पीएम2.5 सांद्रता 99.6 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर थी, जो राष्ट्रीय औसत 48.9 से काफी अधिक और डब्ल्यूएचओ के दिशानिर्देशों से लगभग दस गुना अधिक थी। द लांसेट काउंटडाउन 2025 ने पहले अनुमान लगाया था कि भारत में परिवेशी पीएम2.5 सालाना 1.72 मिलियन मौतों का कारण बनता है।