नई दिल्ली। भारत में आवासीय डिजाइन के क्षेत्र में रोजमर्रा के आराम को प्राथमिकता देने का चलन बढ़ रहा है। इसी के चलते टॉवेल वार्मर की मांग में तेजी देखी जा रही है, जो पहले केवल लग्जरी होटलों तक सीमित थे। घर के मालिक अब केवल टाइल्स और सैनिटरीवेयर से आगे बढ़कर सोच रहे हैं। सर्दियों और उमस के मौसम में तौलिये को बेहतर तरीके से सुखाने के लिए एनिडेल टॉवेल वार्मर एक व्यावहारिक सुविधा के रूप में उभर रहे हैं।
यह रुझान व्यापक वैश्विक बाजार की वृद्धि के साथ मेल खाता है। साल 2025 में वैश्विक टॉवेल वार्मर बाजार का मूल्य लगभग 922.54 मिलियन अमेरिकी डॉलर था। यह बाजार 2035 तक 10.1 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ने का अनुमान है। साल 2026 में उद्योग का अनुमानित राजस्व 1 billion अमेरिकी डॉलर तक पहुंच जाएगा। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि एशिया प्रशांत क्षेत्र इस वृद्धि का मुख्य चालक होगा, जिसमें शहरी विकास और बढ़ती खर्च योग्य आय के कारण इसी अवधि में 11.31 प्रतिशत की अनुमानित CAGR दर्ज की जाएगी।
वर्तमान में आवासीय अनुप्रयोग सबसे तेजी से बढ़ने वाला खंड है। यह बाथरूम को वेलनेस सैंक्चुअरी में बदलने की उपभोक्ता-संचालित इच्छा से समर्थित है। बाजार में वॉयस कंट्रोल, ऐप कनेक्टिविटी और प्रोग्रामेबल थर्मोस्टैट जैसी स्मार्ट तकनीक की ओर भी बदलाव देखा जा रहा है। आराम के अलावा, टॉवेल वार्मर को उनके स्वास्थ्य लाभों के लिए भी तेजी से महत्व दिया जा रहा है, क्योंकि तेजी से सूखने से फफूंद और मोल्ड का निर्माण रुकता है। जैसे-जैसे भारतीय बाथ फिटिंग बाजार 2030 तक 16.67 बिलियन डॉलर के अनुमानित मूल्य की ओर बढ़ रहा है, टॉवेल वार्मर जैसे एकीकृत समाधान आधुनिक और उच्च अंत आवासीय interiores की पहचान बन रहे हैं।